जगमग- सी एक लड़की,
अल्ह्हड़ मुस्कुराती सी
कभी हवा से बातें करती,
कभी खुद -में गुनगुनाती सी
कभी सबकी दोस्त वो,
कभी किसी को न चाहती सी
दूर गगन में उड़ना चाहती,
कभी कुछ घबराती सी
सपने कभी संजो कर रखती,
लहरों संग कभी उन्हें बहाती सी
कभी खुश, कभी नाराज़ ज़िनदगी से,
कभी कुछ सवाल उठाती सी
कभी औरों को समझाती,
कभी खुद ही न समझ पाती सी
एक पल में ये, एक पल में वो,
सारी दुनिया पे हुकूमत जमाती सी
कभी सयानी , कभी नादानी वो
कुछ उलझी सी , कुछ सुलझी
कैसी है वो... कभी खुद भी
ये न जान पायी वो !
Waah Waah !!!
ReplyDeleteKya Baat hai !!!
Really nice.........
beautiful is the word for poem, inspiration and author!
ReplyDelete@ Anand Sir and Arshi....thanks a ton. Your comments are really valuable. Please keep visiting.
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